परदेसी

Posted: April 14, 2014 in Love
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कमजोर कहो तुम उस मिट्टी को
जिसने था तुमको जन्म दिया
और छोड़ चलो परदेस बाबू
ऐसा क्या तुमपर करम किया?

माना रही माहान कभी
अब अबला है बेचारी है
जाने कितने बच्चे इसके
पर बांझ सी इक नारी है।

अब बचा नहीं कुछ खास यहाँ
बस हिंसा है घोटाले है
नैन रहे इसके अंगारें
अब नीर भरे दो प्याले है।

बेबस सी लाचार ये माँ
कहती है मुझको अपनाओ
मेरी ख्याती विश्व सराहे
ए सुपुत्र तुम भी दोहराओ।

अपने सफल भविष्य के खातिर
अनसुनी कर इसकी फरियाद
छोङ चलो परदेस बाबू
ऐसा क्या देगी ये मात?

पैसा ही बस चाहो तुम
और चाहो ना कुछ मेरे सयिय्या
सात समुद्र पार रहो
मझधार मे कर मेरी नयिय्या।

प्रेम मेरा किस काम का
ना शिक्षा न देगा पैसा
दो पल मेरे साथ बिताओ
फिर होगा जाने कब ऐसा।

छोङ चलो मुझको पिया
देखो ना मेरी सूरत
तुम मेरे प्राणो के रखवाले
मैं माटी की मूरत बदसूरत।

जा रहे तुम दूर बहुत
छोङकर बेबस नारी
बूढी माँ और बेचैन माशूका
लगती थी सबसे प्यारी।

ये बाधा और अवरोध लगे
अब बचा ही क्या है इनके पास
छोड़ चलो परदेस पिया
है ही क्या अब इनमें खास?

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